Major Mohit Sharma Biography In Hindi

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Moviesverse.info:- Major Mohit Sharma Biography In Hindi:इस पोस्ट में मेजर मोहित शर्मा के जीवनी के बारे में बताया गया है जिन्हें वीरता के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया, जो भारत का सर्वोच्च शांति-कालिक सैन्य अलंकरण (India’s highest peace-time military decoration) है। मेजर मोहित शर्मा को भारत हमेशा याद रखेगा | वह उन वीरों में से थे जिन्हें अपनी जान से ज्यादा अपने देश से प्यार था|

Major Mohit Sharma Biography In Hindi, Age, Wife, Family

Major Mohit Sharma Biography In Hindi (मेजर मोहित शर्मा की जीवनी)

नाम (Name) मोहित शर्मा
उपनाम (Nick Name) चिंटू, माइक
जन्म तिथि (Date Of Birth) 13 जनवरी 1978 (शुक्रवार)
जन्मस्थान (Birth Place) रोहतक (हरियाणा)
मृत्यु के समय आयु (Age At The Time Of Death) 31 साल
ऊंचाई (Height)
186 सेंटीमीटर ( 6 फीट 1 इंच)
शहादत की तारीख (Date Of Death) 21 मार्च 2009 (शनिवार)
शहादत का स्थान  हफ्रुदा के जंगल
आंखों का रंग काला
बालों का रंग काला
गृहनगर रोहतक (हरियाणा)
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म हिंदू
स्कूल मानव स्थली स्कूल, डीपीएस स्कूल गाजियाबाद
कॉलेज / यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (पुणे)
शौक (Hobby)
मुक्केबाजी, तैराकी और घुड़सवारी
पसंदीदा घोड़ा का नाम
इंदिरा
सर्विस भारतीय सेना
सर्विस नंबर  IC-59066N
रैंक मेजर
सेवा वर्ष 1999-2009
रेजीमेंट पैराशूट रेजीमेंट
यूनिट वन पैरा (स्पेशल फोर्सेस)

Major Mohit Sharma Family (मेजर मोहित शर्मा का परिवार)

 

माता का नाम सुशीला शर्मा
पिता का नाम राजेंद्र प्रसाद शर्मा
भाई का नाम मधुर शर्मा (बड़े भाई)

Major Mohit Sharma’s Wife ( मेजर मोहित शर्मा की पत्नी)

पत्नी का नाम रिशिमा शर्मा

मेजर मोहित शर्मा अपनी पत्नी से 2003 में मिले थे और आपको बता दें कि मेजर मोहित शर्मा की पत्नी भी सेना में मेजर के पद पर हैं और इन दोनों की मुलाकात चंडीगढ़ में हुई थी|

मेजर मोहित शर्मा की पत्नी का एक खास विडियो जरुर देखें :-

Major Mohit Sharma’s Early Life & Education (मेजर मोहित शर्मा का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा)

अपने दोस्तों के बीच माइक नाम से मशहूर मेजर मोहित शर्मा का जन्म 13 जनवरी को रोहतक हरियाणा में हुआ था और घर वाले मेजर मोहित शर्मा को प्यार से चिंटू कहकर पुकारते थे |मेजर मोहित शर्मा ने अपनी शुरुआती शिक्षा दिल्ली की मानव स्थली स्कूल से की और फिर उन्होंने बाकी की शिक्षा डीपीएस स्कूल गाजियाबाद से की| मेजर मोहित शर्मा के परिवार वाले चाहते थे कि वह बड़े होकर इंजीनियर बने क्योंकि उनके परिवार वाले को लगता था कि मेजर मोहित शर्मा आर्मी में कभी भर्ती नहीं हो सकते क्योंकि उनका वजन काफी कम था और उनकी फिजिकल फिटनेस उतनी अच्छी नहीं थी और एक वजह यह थी कि उनके बड़े भाई मधुर शर्मा पढ़ाई में काफी अच्छे थे इसलिए परिवार वाले को लगता था कि मधुर शर्मा एनडीए की परीक्षा पास कर सकते हैं, इसलिए परिवार वालों ने बड़े भाई को एनडीए की तैयारी में लगा दिया लेकिन मधुर शर्मा एनडीए की परीक्षा पास नहीं कर पाए| उसके बाद मेजर मोहित शर्मा ने ठान लिया कि वह इंडियन आर्मी में भर्ती होंगे और 12वीं के बाद मोहित शर्मा ने संत गजानन महाराज कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, महाराष्ट्र में एडमिशन लिया और इसी दौरान उन्होंने एनडीए का तैयारी शुरू की | इस दौरान उन्होंने एनडीए की परीक्षा पास कर ली और एसएसबी इंटरव्यू भी निकाल लिया और इसके बाद उन्होंने अपने घर वालों को फोन करके बताया कि उन्होंने एनडीए की परीक्षा पास कर ली तोह घरवालों को यकीन नहीं हुआ क्योंकि मेजर मोहित शर्मा ने एनडीए का फॉर्म गुपचुप तरीके से भरा था और इसकी खबर उनके परिवार वालों को नहीं थी और जब बड़े भाई को यह बात पता चली तो बड़े भाई को लगा कि मोहित शर्मा मजाक कर रहे हैं लेकिन मोहित शर्मा ने फोन पर कहा कि उन्होंने एसएसबी इंटरव्यू पास कर ली है और वह एनडीए में जाने की तैयारी कर रहे हैं इसके बाद बड़े भाई को यकीन हो गया |

Major Mohit Sharma Biography In Hindi

सन 1995 में मेजर मोहित शर्मा ने एनडीए ज्वाइन की | मेजर मोहित शर्मा एक ऐसे इंसान थे, जो एक बार जो कमिटमेंट कर लेते थे उसके बाद उसे हर हाल में पूरा करते थे | मेजर मोहित शर्मा में एक्सीलेंस और परफेक्शन की कमी नहीं थी और इसी वजह से वह अपने एनडीए कोर्स के दौरान अपने बैच के सबसे एक्सीलेंट कैडेट में से एक थे| अपने कोर्स के दौरान मेजर मोहित शर्मा  हॉर्स राइडिंग चैंपियन, बॉक्सिंग चैंपियन और सबसे अच्छा तैराक का खिताब जीता | मेजर मोहित शर्मा के परफॉर्मेंस को देखते हुए इंडियन मिलट्री अकैडमी में उन्हें बटालियन कैडेट एडजुटेंट के रैंक से सम्मानित किया गया |

वैसे मोहित शर्मा को एक आम दिल्ली वाले लड़के की तरह शौख था जैसे अच्छे कपड़े पहनना, घूमना-फिरना और दोस्तों के साथ पार्टी करना |मेजर मोहित शर्मा माइकल जैकसन के बहुत बड़े फैन थे| मोहित शर्मा एक जिंदादिल इंसान थे और वह अपने जिंदगी को बहुत खुल कर जीते थे| एक इंटरव्यू के दौरान मेजर मोहित शर्मा के माता-पिता ने बताया था कि वह बचपन से काफी होनहार थे और वह सभी से अच्छे से पेश आते थे ,घर के सभी लोगों के को बहुत इज्जत करते थे और आकर्षित करने का उनमें गुण था लोग अपने आप ही उनकी तरफ आकर्षित हो जाते थे |

Major Mohit Sharma Biography In Hindi, Age, Wife, Family

मेजर मोहित शर्मा को इंस्ट्रूमेंट बजाने का काफी शौक था इसलिए उन्हें कीबोर्ड बजाना शुरु किया लेकिन उन्हें दो- चार साल के बाद उन्होंने कीबोर्ड छोड़ दिया और कहा कि मुझे कुछ और करना है और उन्होंने फिर स्पेनिश गिटार बजाना बजाना शुरू कर दिया |मेजर मोहित शर्मा काफी अच्छे गाते थे |उनकी आवाज काफी सुरीली थी और जब भी वह कोई फंक्शन में जाते थे तो लो लोग उन्हें गाना सुनाने को बोलते थे |

Major Mohit Sharma’s Military Career (मेजर मोहित शर्मा का मिलिट्री करियर)

Major Mohit Sharma Biography In Hindi

मेजर मोहित शर्मा ने 11 दिसंबर 1999 को इंडियन मिलिट्री एकेडमी से पास होकर पांचवी मद्रास रेजीमेंट में शामिल हुए और इसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 38वीं राष्ट्रीय राइफल को ज्वाइन करके कई एनकाउंटर इनसरजेंशी में भाग लिया आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स को आतंकवाद गतिविधि को रोकने के लिए तैनात किया गया है और इसी में शामिल होकर मेजर मोहित शर्मा ने अपना साहस का परिचय दिया और उनके इस वीरता के लिए मेजर मोहित शर्मा को उनके सर्विस के तीसरे साल ही सन 2002 में पहले गैलंट्री मेडल से सम्मानित किया गया |

मेजर मोहित शर्मा के माता पिता चाहते थे कि वह ऐसे रेजीमेंट में शामिल हो जहां कोई खतरा ना हो लेकिन मेजर मोहित शर्मा हमेशा से ही पैरा स्पेशल फोर्सज को ज्वाइन करना चाहते थे | 2002 के अंत में उन्होंने पैरा स्पेशल फोर्सेज के  ट्रेनिंग के में भाग लिए और 2003 में वह 1-पैरा स्पेशल फोर्सेज में शामिल हो गए| कमांडो बनने के बाद उन्होंने कई Anti-terror ऑपरेशन में भाग लिया और उन्हें 2004 में उनकी बहादुरी के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया गया था | मेजर मोहित शर्मा जनवरी 2005 और दिसंबर 2006 में बेलगांव में स्थित कमांडो ट्रेनिंग सेंटर में इंस्ट्रक्टर भी रहे थे | मेजर मोहित शर्मा की जब भी पोस्टिंग कश्मीर में होती थी उसके 5 से 6 महीने पहले वह उसकी तैयारी शुरू कर देते थे जैसे कि बाल बढ़ाना ,दाढ़ी बढ़ाना और कश्मीरी वेशभूषा को अपनाना और उन्होंने कश्मीर की डोगरी भाषा भी सीख ली थी |

Major Mohit Sharma As IFTIKHAR Bhatt

मेजर मोहित शर्मा ने सन 2004 को एक ऑपरेशन  में भाग लिया था जिसमें उनका नाम इफ्तिकार रखा गया था और यह ऑपरेशन उनके द्वारा किए गए उन ऑपरेशन में से एक है जो आज भी कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है | इस ऑपरेशन को कश्मीर से 50 किलोमीटर दूर सोफियन में अंजाम दिया गया था | इस ऑपरेशन के लिए उन्होंने अपना हुलिया बदल दिया और अपनी दाढ़ी मूछ बढ़ा ली ताकि वह एक आतंकवादी जैसा दिखें और इस तरह मेजर मोहित शर्मा बन गए इफ्तिकार भट्ट | इस नाम के साथ वह अबू तोरारा और अबू सब्जार के सम्पर्क में आये जो कि उस वक्त हिजबुल के कमांडर थे और यह दोनों ही काफी खूंखार आतंकवादी थे और इन दोनों ने कई लोगों को और कई आर्मी के जवानों  को मारा था | इन दोनों के संपर्क में आने के बाद मेजर मोहित शर्मा ने इन दोनों को बताया कि सन 2001 में उनके बड़े भाई को भारतीय सेना ने मार दिया था और अब वह अपने भाई का बदला भारतीय सेना से लेना चाहते हैं | अपनी मनगढ़ंत बात बताने के बाद मेजर मोहित शर्मा ने उन दोनों से कहा की इस काम में उन दोनों की उन्हें मदद चाहिए और इस तरह मेजर मोहित शर्मा ने उन दोनों आतंकवादी को विश्वास दिला दिया कि वह भारतीय सेना से बदला लेना चाहते हैं और इसके लिए वह तैयारी भी कर चुके हैं|

इस ऑपरेशन के दौरान मेजर मोहित शर्मा से उन आतंकवादियों ने कई बार सवाल भी पूछे लेकिन हमेशा की तरह मेजर मोहित शर्मा ने अपना जवाब नहीं बदला और हमेशा कहते रहे उनका नाम इफ्तिकार भट्ट है और वह भारतीय सेना से बदला लेना चाहते हैं लेकिन उन दोनों में से एक आतंकवादी जिसका नाम अबू तोरारा था उसे मेजर मोहित शर्मा पर शक रहता था लेकिन आखिर में उन दोनों आतंकवादियों ने मेजर मोहित शर्मा को मदद का भरोसा दिलाया और उन दोनों आतंकवादियों को विश्वास हो गया था कि इफ्तिकार भट्ट अपना भाई का सच में बदला लेना चाहता है और इसके बाद आतंकवादियों ने उन्हें बताया कि वह कई हफ्तों तक अंडरकवर रहेंगे और हमले के लिए मदद जुटाएंगे|

मेजर मोहित शर्मा ने आतंकवादियों को यह कह कर मना लिया था कि वह जब तक भारतीय सेना के चेकप्वाइंट को उड़ा नहीं देते तब तक वह घर लौटेंगे नहीं लौटेंगे और कुछ समय बाद उन आतंकवादियों ने पूरी तैयारी कर ली , तीन और आतंकवादी को  बुला लिया लेकिन अबू तोरारा को दोबारा मोहित शर्मा पर शक हुआ तो इस बार उसका शक दूर करने के लिए मेजर मोहित शर्मा ने कहा कि अगर मेरे बारे में कोई शक है तो मुझे अभी मार दो और ऐसा कह कर उन्होंने अपने हाथ में बंदूक को छोड़ दिया और उन्होंने कहा कि तुम इस में भाग नहीं ले सकते क्योंकि तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं है और मेजर मोहित शर्मा ने उन दोनों से कहा कि तुम्हारे पास ऐसे में मुझे मारने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है और इस बात को मेजर मोहित शर्मा ने बड़ी विश्वास के साथ कहा और मेजर मोहित शर्मा की बात सुनकर बहुत दोनों आतंकवादी दुविधा में पड़ गए और इतने में मेजर मोहित शर्मा को मौका मिला और उन्होंने थोड़ी दूर जाकर अपनी 9 एमएम की पिस्टल को लोड कर उन दोनों आतंकवादियों को मौत की नींद सुला दिया और इसके बाद मेजर मोहित शर्मा ने उन दोनों आतंकवादियों का हथियार उठाकर अपने नजदीकी के आर्मी कैंप में आ गए |

Major Mohit Sharma Death Reason

सन 2009 में आम चुनाव से पहले आतंकी गतिविधियां काफी बढ़ गई थी और खुफिया विभाग ने 1 सप्ताह में तीन घुसपैठ की पुष्टि की थी जिसके कारण कई अलग-अलग जगहों पर एंटीटेरर ऑपरेशन चलाए गए और इस दौरान चार आतंकवादियों को मार गिराया गया | फिर खुफिया विभाग ने सूचना दी कि हफ्रुदा के जंगलों में आतंकवादियों का एक बड़ा ग्रुप छुपा हुआ है |आपको बता दें कि कश्मीर में आप हाफुड़ा के जंगलों को काफी कठिन इलाका माना जाता है क्योंकि इन जंगलों में पेड़ एक दूसरे से सटे होते हैं सट्टे होते हैं जिसके कारण जंगल काफी घना है| जंगल काफी घना होने के कारण यह जंगल आतंकवादियों के लिए काफी सुरक्षित माना जाता है इसलिए इस जंगल में आमलोगों का आना जाना काफी कम है और इसमें एंटी टेरर ऑपरेशन चलाना काफी कठिन काम है |

इस काम को करने के लिए मेजर मोहित शर्मा के वन पैरा एसएफ और राष्ट्रीय राइफल्स के सेकेंड बटालियन को यह काम सौंपा गया| जिस समय यह ऑपरेशन चल रहा था उससे पहले मेजर मोहित शर्मा ने होली की छुट्टी ली थी और उनकी छुट्टी को उनके कमांडिंग ऑफिसर ने मंजूर कर दी थी और वह अपने घर से जाने वाले थे लेकिन इसी दौरान मेजर मोहित शर्मा के एक साथी के चचेरे भाई का देहांत हो गया और उनके साथी ने अपने कमांडिंग ऑफीसर से 2 दिन की छुट्टी मांगी लेकिन कमांडिंग ऑफिसर ने छुट्टी देने से यह कहते हुए मना कर दिया की अभी स्टाफ की बहुत कमी है  क्योंकि मेजर मोहित शर्मा का छुट्टी पहले मंजूर कर दिया गया था लेकिन जब यह बात मेजर मोहित शर्मा को पता चली तो उन्होंने अपनी कमांडिंग ऑफिसर से रिक्वेस्ट की और कहा कि उनकी दोस्त की छुट्टी को मंजूर कर दिया जाए और उनके दोस्त की जगह उन्हें ड्यूटी पर रख लिया जाए और मेजर मोहित शर्मा ने कहा कि उनकी छुट्टी को 1 महीने के लिए टाल दिया जाए यानी कि जब उनका दोस्त जब छुट्टी पर से वापस आएगा तो मेजर मोहित शर्मा छुट्टी पर जाएंगे | अगर मेजर मोहित शर्मा अपने छुट्टी को नहीं टालते तो मेजर मोहित शर्मा आज जिंदा होते | 21 मार्च 2009 को मेजर मोहित शर्मा को हफ्रुदा के जंगलों में आतंकवादियों  के सही पता ठिकाने का पता लगाने का काम सौंपा गया और इस दौरान मेजर मोहित शर्मा अपने 10 साथियों के साथ आप हफ्रुदा के जंगलों में आतंकवादियों का पता लगाने के लिए निकल पड़े और इस ऑपरेशन के दौरान आगे जाकर उन्हें कई आतंकवादियों ने घेर लिया और इस दौरान दोनों तरफ से काफी गोलीबारी शुरू हो गई और इस दौरान मेजर मोहित शर्मा के एक साथी को गोली लग गई उसे बचाने के लिए मेजर मोहित शर्मा ने कमान संभाली और अपने साथी को वहां से निकाला और इस दौरान वह घायल हो गए और उन्हें कई सारी गोली लग गई और गोली लगने के बाद भी वह आतंकवादियों से मुकाबला करते रहें और 21 मार्च 2009 को वह आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए और  मेजर मोहित शर्मा को आतंकवादियों के खिलाफ असाधारण वीरता, अदम्य साहस और प्रेरक नेतृत्व के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया, जो भारत का सर्वोच्च शांति-कालिक सैन्य अलंकरण है (India’s highest peace-time military decoration).

Major Mohit Sharma Movie

मेजर मोहित शर्मा के जीवन पर एक फिल्म बनने जा रही है जिसका नाम IFTIKHAR रखा गया है और इसे 2022 में रिलीज किया जाएगा|

मेजर मोहित शर्मा का कुछ इमोशनल वीडियो

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