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A. P. J. Abdul Kalam Biography In Hindi (एपीजे अब्दुल कलाम जीवनी)

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A. P. J. Abdul Kalam Biography In Hindi: एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम है| हम कह सकते हैं कि एपीजे अब्दुल कलाम वह व्यक्ति थे जिनका आज तक कोई आलोचक नहीं है| एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के रूप में विख्यात थे| एपीजे अब्दुल कलाम भारत के 11 वें राष्ट्रपति थे| वह एक जाने-माने वैज्ञानिक और इंजीनियर थे| एपीजे अब्दुल कलाम के विचार आज भी सारे युवा पीढ़ी को प्रेरित करती है| वह भारत के मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे थे और इन्हें भारत में मिसाइल मैन के रूप में जाना जाता है| स्विट्जरलैंड में 26 मई को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है क्योंकि 26 मई 2005 को एपीजे अब्दुल कलाम ने स्वीटजरलैंड को विजिट किया था और  इसी दिन को वहां की सरकार ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस घोषित कर दिया|

A. P. J. Abdul Kalam Biography In Hindi

A. P. J. Abdul Kalam Biography In Hindi | Wiki

नाम अबुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम
उपनाम मिसाइल मैन, जनता के राष्ट्रपति
जन्मतिथि
15 अक्टूबर 1931
जन्मस्थान
धनुषकोडी गांव (रामेश्वरम, तमिलनाडु)
मृत्यु तिथि
27 जुलाई 2015 (शिलांग)
उम्र (मृत्यु के वक्त)
83 वर्ष
मृत्यु का कारण
दिल का दौरा
समाधि स्थल
पेई करुंबू (रामेश्वरम)
गृहनगर
रामेश्वरम
शैक्षिक योग्यता
आईआईटी मद्रास से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग डिग्री
राष्ट्रीयता
भारतीय

Early Life Of A. P. J. Abdul Kalam (अब्दुल कलाम का प्रारंभिक जीवन)

एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गांव (रामेश्वरम, तमिलनाडु) में हुआ था| इनका जन्म मध्यमवर्ग मुस्लिम अंसार परिवार में हुआ था|इनके माता का नाम आशिमा जैनुलाब्दीन था | इनके पिता का नाम जैनुलआबिद्दीन था जो कि ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे और इनके पास ज्यादा पैसा भी नहीं था | अब्दुल कलाम के पिता एक मछुआरा थे और इनका परिवार काफी बड़ा था | इनके  परिवार में पांच भाई एवं पांच बहन थे और इनके एक घर में 3 परिवार रहा करते थे | अब्दुल कलाम के जीवन में उनके पिता का बहुत प्रभाव रहा हालांकि उनके पिता पढ़े-लिखे नहीं थे लेकिन उनके दिए संस्कार अब्दुल कलाम को एक नई ऊंचाइयों तक ले गया | इनकी शुरुआती शिक्षा की शुरुआत रामेश्वरम के प्राथमिक विद्यालय से हुई थी और उस समय उनकी उम्र 5 वर्ष था | अब्दुल कलाम ने अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए न्यूज़पेपर वितरित करने का काम भी किया |वह रोजाना ट्रेनों में अखबार बेचा करते थे|

जब वह पांचवी कक्षा में थे तब उनके अध्यापक बच्चों को पक्षी के उड़ने के तरीके के बारे में जानकारी दे रहे थे लेकिन  उनमें से कुछ बच्चों को समझ में नहीं आया इसलिए अध्यापक ने बच्चों को समुद्र तट पर ले जाकर पक्षियों को दिखाकर उन्हें अच्छे से समझाया |उसी समय एपीजे अब्दुल कलाम ने तय कर लिया कि वह बड़े होकर एरोनॉटिकल इंजीनियर बनेंगे | गरीबी होने के बावजूद एपीजे अब्दुल कलाम को पढ़ने का काफी शौक था इसलिए वह सुबह 4:00 बजे गणित की ट्यूशन पढ़ने जाते थे|

अब्दुल कलाम ने 1950 में आईआईटी मद्रास से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की| 1958 में अब्दुल कलाम के जीवन में ऐसा समय आया जब इन्हें दो जगह से इंटरव्यू लेटर का कॉल आया और इन्हें पहला इंटरव्यू लेटर मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस से आया और दूसरा इंटरव्यू लेटर एयर फोर्स से आया और उनका सपना पायलट बनने का था इसलिए उन्होंने एयर फोर्स को चुना लेकिन समस्या यह थी कि मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस का इंटरव्यू दिल्ली में था और एयरफोर्स का इंटरव्यू देहरादून में था | वह देहरादून चले गए लेकिन वहां भी एक समस्या आ गई वहां कुल 25 लोग आए थे जिनमें सिलेक्शन 9 का होना था और इंटरव्यू देने के बाद इनकी रैंक 10वी आई, इस कारण इनका सिलेक्शन नहीं हो पाया और वह देहरादून से ऋषिकेश चले गए वहां उनकी मुलाकात स्वामी शिवानन्द से हुई | स्वामी जी ने उन्हें गीता की एक बुक उपहार में दी और गीता पढ़ने के साथ-साथ मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस का इंटरव्यू देने को कहा | एपीजे अब्दुल कलाम दिल्ली वापस आ गए और वहां उन्होंने मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस का  इंटरव्यू दिया और उनका सिलेक्शन मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में हो गया |

A. P. J. Abdul Kalam As A Scientist (एपीजे अब्दुल कलाम का वैज्ञानिक जीवन)

काम करने के दौरान अब्दुल कलाम को विक्रम साराभाई के ग्रुप में चुन लिया गया| विक्रम साराभाई एक महान भारतीय वैज्ञानिक थे| 1963 में अब्दुल कलाम को 6 महीने की ट्रेनिंग के लिए नासा भेजा गया| नासा ने एपीजे अब्दुल कलाम को कई ऑफर दिए ताकि एपीजे अब्दुल कलाम अमेरिका में रुक जाए लेकिन अब्दुल कलाम ने अपने देश सेवा को ऊपर रखा और वह भारत लौट आये|

“यह मेरा पहला चरण था; जिसमें मैंने तीन महान शिक्षकों-विक्रम साराभाई, प्रोफेसर सतीश धवन और ब्रह्म प्रकाश से नेतृत्व सीखा। मेरे लिए यह सीखने और ज्ञान अर्जित करने का समय था।”- – अब्दुल कलाम

सन 1972 में वह इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) से जुड़े| 1973 को एपीजे अब्दुल कलाम को रोहिणी  सेटेलाइट लांच करने के लिए प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनाया गया और उन्हें भारत का पहला उपग्रह प्रक्षेपण यान बनाने की जिम्मेदारी मिली| 17 अगस्त 1979 को slv-3 (भारत का पहला उपग्रह प्रक्षेपण यान) को लांच करना था और इस मिशन के डायरेक्टर एपीजे अब्दुल कलाम थे| इनका मिशन सैटेलाइट को ऑर्बिट में पहुंचाना था और सेटेलाइट को लांच करने के लिए एपीजे अब्दुल कलाम श्रीहरिकोटा लॉन्च पैड पर पहुंच गए लेकिन लांच करने से पहले कंप्यूटर ने कुछ त्रुटि होने की जानकारी दी और उस समय एपीजे अब्दुल कलाम के पीछे 6 एक्सपर्ट खड़े थे और सभी ने देखा कि कंप्यूटर पर एक मैसेज आ रहा है जिसमें लिखा है कि सिस्टम में लीकेज हो रहा है लेकिन एक्सपर्ट ने सुझाव दिया कि हमारे पास काफी सारा फ्यूल है और हम लांच कर सकते हैं| सभी की बात सुनकर एपीजे अब्दुल कलाम ने फैसला किया कि वह इस सेटेलाइट को लांच करेंगे और उन्होंने राकेट लॉन्च कर दिया लेकिन सेकंड स्टेज पर पहुंचने पर रॉकेट सीधा बंगाल की खाड़ी में समा गया | एपीजे अब्दुल कलाम अपने जीवन में पहली बार फेल हुए थे और उन्होंने वहां से यह सीखा कि फेलियर (Failure) को कैसे हैंडल करना है| मिशन के फेल होने के अगले साल यानी कि 18 जुलाई 1980 को रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया और यह एपीजे अब्दुल कलाम के लिए एक बड़ा अचीवमेंट था| इस सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च करने के बाद भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया|

1965, 1971 लड़ाई के बाद भारत को अपनी मिसाइल बनाने की जरूरत महसूस हुई क्योंकि उस समय भारत के पास किसी भी किस्म की मिसाइल मौजूद नहीं थी और यह जिम्मेदारी सौंपी गई एपीजे अब्दुल कलाम को |सन 1982 को एपीजे अब्दुल कलाम को डीआरटीओ ज्वाइन करने के लिए कहा गया और उन्हें पांच मिसाइल को डिजाइन और बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई और वह पांच मिसाइल इस प्रकार हैं :- त्रिशूल (त्रिशूल कम दूरी का जमीन से हवा में मार करने वाला मिसाइल है), अकाश (यह एक मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है) ,नाग (यह एक टैंक भेदी मिसाइल है), पृथ्वी (यह एक सतह से सतह मार करने वाला बैलिस्टिक मिसाइल है ) और अग्नि (यह सतह से सतह पर मार करने वाली परमाणु सक्षम मिसाइल है और यह मिसाइल 1 कॉन्टिनेंट से दूसरे कॉन्टिनेंट को टारगेट कर सकती है।)| एपीजे अब्दुल कलाम ने इन सभी मिसाइलों को अपने दम पर बना कर दिखाया और इन मिसाइलों को बनाने में किसी भी देश से मदद नहीं ली गई थी| भारत ने एपीजे अब्दुल कलाम की देखरेख में दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया और यह परीक्षण 1998 में पोखरण में हुआ और इस तरह भारत परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल हो गया |

A. P. J. Abdul Kalam As A President (अब्दुल कलाम राष्ट्रपति के रूप में)

सन 2002 में भाजपा की सरकार ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया था | जिसे विरोधी दलों के अलावा समस्त दलों ने समर्थन किया 18 जुलाई 2002 को अब्दुल कलाम को 90% बहुमत द्वारा भारत का राष्ट्रपति चुन लिया गया था| 25 जुलाई 2002 को एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली और उनका कार्यकाल 25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ और आपको बता दें कि सन 1992 में एपीजे अब्दुल कलाम भारतीय रक्षा मंत्रालय में वैज्ञानिक सलाहकार भी रह चुके हैं|

A. P. J. Abdul Kalam’s Personal Life (अब्दुल कलाम का व्यक्तिगत जीवन)

अब्दुल कलाम बेहद अनुशासित व्यक्ति थे | वह सभी धर्मों का पालन करते थे, वह कुरान और भागवत गीता दोनों का अध्ययन किया करते थे| कलाम को कविता का काफी शौक था और वह खाली समय में कविता लिखा करते थे और उन्हें वीणा बजाने का काफी शौक था|  खाली वक्त में वह बच्चों और युवाओं के बीच जाकर उन्हें प्रोत्साहित किया करते थे| एपीजे अब्दुल कलाम जीवन भर शाकाहारी रहे| सबसे हैरानी की बात यह है कि वह जीवन भर अविवाहित रहे और उन्होंने एक पत्रकार को जवाब देते हुए कहा था कि उनकी शादी हो चुकी है और उन्होंने मिसाइल से शादी की है| विंग्स ऑफ फायर नामक किताब एपीजे अब्दुल कलाम का ऑटो बायोग्राफी है| एपीजे अब्दुल कलाम ने 15 से ज्यादा बुक खुद लिखे हैं|

Awards and Honours

एपीजे अब्दुल कलाम 40 विश्वविद्यालयों के मानद डॉक्टरेट के प्राप्तकर्ता थे। वैसे एपीजे अब्दुल कलाम खुद एक भारतवासियों के लिए अवार्ड थे और शायद ही कोई उनके जैसा दूसरा कभी पैदा होगा लेकिन फिर भी यहां पर कुछ लोकप्रिय अवार्ड मेंशन किया गया है|  सन 1981 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मभूषण और सन 1990 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था और यह सम्मान उन्हें इसरो और डीआरडीओ में कार्यों के दौरान वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए दिया गया था | सन 1997 में उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था और यह सम्मान उन्हें वैज्ञानिक अनुसंधान और भारत में तकनीकी के विकास में अभूतपूर्व योगदान के लिए दिया गया था |

Death of APJ Abdul Kalam (एपीजे अब्दुल कलाम का निधन)

27 जुलाई 2015 को अब्दुल कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलांग में एक भाषण दे रहे थे तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वह बेहोश होकर गिर पड़े और लगभग 6:30 बजे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन 2 घंटे बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और अपने मृत्यु के 9 घंटे पहले अब्दुल कलाम ने ट्वीट करके बताया था कि वह शिलांग आईआईएम में लेक्चर देने जा रहे हैं| जिस समय अब्दुल कलाम का निधन हुआ उस समय उनकी उम्र 83 वर्ष था| 30 जुलाई 2015 को एपीजे अब्दुल कलाम को उनके गांव रामेश्वरम में दफना दिया गया और उनके अंतिम संस्कार के समय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, तमिलनाडु के राज्यपाल ,आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों सहित  350000 से भी अधिक लोग मौजूद थे | जिस जगह एपीजे अब्दुल कलाम को दफनाया गया उस जगह एक बेहद सुंदर एपीजे अब्दुल कलाम मेमोरियल बनाया गया है और इसमें एपीजे अब्दुल कलाम के बहुत सारे तस्वीर लगे हुए हैं जो उनके सफर को दिखाते हैं |

 

 

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